जल चक्र (Hydrological Cycle) एवं समुद्री उत्थान

UNIT–13

जल चक्र (Hydrological Cycle)

विशेषताएँ

  • जल चक्र संतत प्रक्रिया है।

  • यह एक नवीकरणीय (Renewable) संसाधन है।

जल चक्र की परिभाषा

जल की धरातल से महासागरों एवं जलाशयों से वाष्प बनकर वायुमंडल में जाना तथा पुनः वर्षा के रूप में पृथ्वी पर लौट आना जल चक्र कहलाता है।

  • यह अरबों वर्षों से चलने वाली प्रक्रिया है।

  • जल चक्र तरल, ठोस एवं गैस – तीनों अवस्थाओं में कार्य करता है।


पृथ्वी पर जल का वितरण

  • पृथ्वी की सतह का लगभग 70.8% (लगभग 71%) भाग जल से ढका है।

पृथ्वी पर जल का वितरण (आयतन एवं प्रतिशत)

जल का भंडारआयतन (लाख घन किमी)कुल का प्रतिशत
महासागर137097.25%
हिमनद एवं हिमचादर292.05%
भू-गर्भीय जल9.50.68%
झीलें0.1250.01%
नदियाँ0.0650.005%
वायुमंडल0.0130.001%
मृदा नमी0.0010.0001%
जैवमंडल0.00060.00004%

जल चक्र के घटक एवं प्रक्रियाएँ

स्रोत

  1. महासागरों में स्थित जल

  2. वायुमंडल में जल

  3. हिम एवं बर्फ में संग्रहीत जल

  4. स्थलीय जल प्रवाह

  5. भूमिगत जल संग्रह

प्रक्रियाएँ

  • वाष्पीकरण

  • संघनन

  • वर्षा

  • हिम पिघलने पर नदियों में जल का प्रवाह

  • नदियों द्वारा जल का महासागर में पहुँचना

  • भूमिगत जल का रिसाव


महत्वपूर्ण तथ्य

  • धरातल पर गिरने वाले जल का लगभग 59% भाग महासागरों एवं अन्य जलाशयों से वाष्पीकृत हो जाता है।

  • शेष जल धरातल पर बहता है या भूमिगत जल के रूप में संचित हो जाता है।

  • नोट: लगभग 20% जल वाष्पीकरण, संघनन एवं वर्षा में सक्रिय रहता है।


समुद्री उत्थान (Ocean Relief)

उपनाम

  • महासागरीय उच्च स्थल

  • अंतःसमुद्री उत्थान

सामान्य तथ्य

  • महासागर पृथ्वी के विशाल गर्तों में स्थित हैं।

  • पृथ्वी की सतह का लगभग 71% भाग महासागरों से ढका है।


महासागरीय उच्च स्थल के भाग

1️⃣ महाद्वीपीय मग्नतट (Continental Shelf)

  • महाद्वीप का सीमांत भाग

  • स्थल एवं सागर के बीच स्थित

  • महासागर का सबसे उथला भाग

  • औसत चौड़ाई: 80 किमी

  • गहराई: 30 से 600 मीटर

  • मत्स्यन, खनिज एवं पेट्रोलियम संसाधनों से समृद्ध

  • सबसे चौड़ा शेल्फ: साइबेरियन शेल्फ (आर्कटिक महासागर)


2️⃣ महाद्वीपीय ढाल (Continental Slope)

  • शेल्फ के बाद तीव्र ढाल वाला भाग

  • ढाल: 2° से 5°

  • गहराई: 200 से 3000 मीटर

  • शेल्फ को महासागरीय गहराई से जोड़ता है

  • कैनियन एवं घाटियाँ पाई जाती हैं

  • मेरियाना ट्रेंच – प्रशांत महासागर

    • विश्व की सबसे गहरी गर्त: 11 किमी


3️⃣ महासागरीय मैदान (Abyssal Plain)

  • मंद ढाल वाले विस्तृत समतल क्षेत्र

  • महासागर का सबसे बड़ा क्षेत्र

  • गहराई: 3000 से 6000 मीटर

  • महीन कणों वाली मिट्टी (सिल्ट व क्ले) से ढका रहता है


4️⃣ महासागरीय गर्त (Oceanic Trench)

  • महासागर के सबसे गहरे भाग

  • लंबी, संकरी एवं गहरी संरचना

  • गहराई: 3–5 किमी या अधिक

  • भूकंपीय क्षेत्र पाए जाते हैं


महासागरीय उत्थान की अन्य आकृतियाँ

1️⃣ मध्य महासागरीय कटक (Mid-Oceanic Ridge)

  • महासागरों में पर्वतों की श्रेणियाँ

  • औसत ऊँचाई: 2500 मीटर

  • मध्य अटलांटिक कटक – अटलांटिक महासागर


2️⃣ समुद्री टीले (Seamounts)

  • समुद्र तल से उठे ज्वालामुखीय पर्वत

  • जल सतह तक नहीं पहुँचते

  • ऊँचाई: 3000 से 4500 मीटर

  • उदाहरण: हवाई द्वीप समूह (प्रशांत महासागर)


3️⃣ जलमग्न कैनियन

  • इनकी तुलना स्थलीय घाटियों से की जाती है

  • उदाहरण: हडसन कैनियन

  • नदियों के मुहानों के पास पाए जाते हैं


प्रवाल भित्तियाँ (Coral Reefs)

निर्माण

  • मूंगे (Coral) की चट्टानों से निर्मित

  • उष्णकटिबंधीय महासागरों में पाई जाती हैं

  • उथले, स्वच्छ एवं गर्म जल में विकसित होती हैं

प्रकार

  1. प्रवाल भित्ति (Fringing Reef)

  2. बैरियर रीफ (Barrier Reef)

  3. एटोल (Atoll)

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